Raj Ashok 09 Jul 2023 कविताएँ समाजिक संघर्ष 33505 0 Hindi :: हिंदी
वक्त जब, मुश्किल होता है। दिल कहता है। हार मान ले। ये आत्मसमर्पण के पल है। यहाँ-से आगे, अब ओर नहीं कोई कल है। अकेले, यों होसले के दम से, इस दुनियाँ मे देख, ये जीवन मुश्किल है। आज, लोगों के पास तेरी हार की बातें है। कब, टुटे तेरा हौसला । इस, इंन्तजार मे ही वक्त गुजर रहा है। इस खेल का रचयिता , जाने कोन । के, ये विधाता है ? मेरे,दर्द की पीड़ा को,अब भला कोन यहाँ बाँट रहा है....... ? चोट मेरी ,बिना किसी मर्हम के क्यों ये ,असहनीय नहीं है। एक, ये मुश्कान चहरे की लोगों से - कह रही है ! कि, अभी आखिर एक और इम्तहान बाकी है। अभी तो नतीजे बदलें जाएगे। जिद् जीने की है। दुनियाँ को,हम इस दुनियाँ मे जी के दिखाएगे। अफशोश, ना करो हम पर, ऐसे खेलों के हम आदी है। ये कोई आज से नहीं है। हम ! टूटे तो फिर खड़े हो जाऐगे। एक सदी क्या, हम हजारों सदीयों तक, लोगों के दिलों मे योहि जिन्दाँ नजर आएगे। आखिर हम यहाँ - काम ही कुछ ऐसा कर जाऐगे । ये, एक वादा है।