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सच और झूठ बोलने में बस इतना ही फर्क है झूठ बोलने वालों की वहा वाही और सच बोलने वालों की तबाही। धन्यवाद read more >>
बार - बार वहां सर झुकाने में अच्छा लगता है जहां तुम्हारी भी कदर हो ,वहां नहीं जहां तुम्हारी कोई इज्जत ही नहीं। धन्यवाद read more >>
सच बोलने वाले लोगों की कदर नहीं होती उसे हर कदम पर अपमान का घूंट पीना पड़ता है । धन्यवाद read more >>
कितना दर्द है तेरी इन आंखों में तू छुपाए पर छुपता नहीं तेरे चेहरे में ऐ आंखें तेरी बयां कर देती लवों से पर कुछ न कहती झलक ही आती है चेह� read more >>
कविता -पापा पढ़ने जाऊंगी गांव में खुलल आंगनबाड़ी मैं पापा पढ़ने जाऊंगी तुम पढ़ें नही तो क्या हुआ? मैं पढ़कर तुम्हें पढ़ाऊंगी, सीख read more >>
मेरी ख़ामोशी को मेरा गुरूर मत समझो, क्योंकि बेवजह आवाज देने की आदत नही है मेरी। ख़ामोश रह कर भी अपनी बात समझाई जा सकती है, बस कोई समझने वा� read more >>
खेल कूद कर आए शाम, बदरी हो या घाम। मां की एक झलक दिख जाए, फिर आंचल में छुप जाए। मां कि इतनी बोली प्यारी, अपने बेटे को क्षमा कर देती मां।� read more >>
छाल पहने पिले रंग कि एक जटाधारी। तीन नयन एक कुंडल माथे चन्द्रधारी। जटा से निकलती गंगाधारी, गले सर्फ कंठ निवाला। शोभे बासहा बैल सवा� read more >>
‘‘अमा यार, तुम्हें मालूम है! आज मेरे घर साधुओं की फौज आई थी।’’ राजेश ने सहकर्मी गौतम से कहा। गौतम ने अनमने ढंग से जवाब दिया,‘&lsquo read more >>
माना कि ये जिन्दागी थोड़ी सी गमगीन है । मामला कुछ ये संगीन है खुद के गमो से बाहर निकल कर देख मंजिले मुसाफिर ये दुनिया अब भी रंगीन है । कि read more >>
उनकी यादो में हम इस कदर डूबे की कुछ याद न रहा कहना था बहुत कुछ उनसे पर ये दिल चुप ही रहा और जब आये बो सामने तो दिल रह न सका फिर इसने उनसे � read more >>
आओ बैठो पास मेरे तुम्हे अपनी कहानी सुनाता हूं जो मेरे साथ हुआ बो सब आज बताता हूं बचपन गुजरा रंगीन फिजाओ में ,कुछ नमी थी उन हवाओ में इस � read more >>
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