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रास्ता
रास्ता जैसा भी उस पर चलना चाहिए, रिस्ता जैसा भी होगा उसे निभाना चाहिए!
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मेरी प्यारी मा
मा तो सबकी प्यारी है ये तो सबसे न्यारी है। मा के जैसा कोई नहीं है ये कहती दुनिया सारी है।। मा तो कभी भी कुछ ना कहती वो तो हमेशा चुप ही रह
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तुम कैसी मां हो?
कविता -तुम कैसी मां हो? फेंक चलीं क्यों ?दिल रोता है! कूड़े में अब दम घुटता है! अंदर ही अंदर दहता है! कितनी विह्वलता है ! मां की
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अंतर्मन
दूसरों के बारे में तो हम बहुत चाव से और बहुत ही उत्सुकता पूर्वक बातें करते हैं उनकी अच्छाइयां उनकी बुराइयां परंतु कभी-कभी हमें स्वयं क
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जीवन के पन्ने
हमारी जिंदगी भी एक किताब की तरह होती है जिसमें मुझे यह नहीं पता होता है कि अगले पन्ने पर क्या लिखा होगा और हमें क्या ज्ञान प्राप्त होगा
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बेचैन
न जाने क्या देखा मैंने उसकी आंखों में जो आज भी उम्र के इस दौर पर याद करके दिल को बेचैन कर देती है
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दर्द
दिल करता है पीछे मुड़कर देखो उन पुरानी बातों को याद करो पर कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि पीछे मुड़ कर देखने पर दुखते हुए दर्द पर जैसे मैं�
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कुछ कहना है
चलो आज जिंदगी से शिकायत करेंगे कुछ जिंदगी मुझसे कहेगी कुछ मैं भी कहूंगी
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शिकायत
क्यों हमेशा गैरों से शिकायत किया जाए क्यों न कभी अपने दिल में झांक कर अपनी भी बुराई की जाए
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इंतजार
क्यों उदास हो हम डूबते हुए सूरज को देख कर क्यों ना एक नई खुशी और उमंग के साथ इंतजार करें उसका सुबह फिर उगते हुए सूरज को देख कर
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खुदा के लिए पेगाम
मेरी गलीयों से गुजरी हवायें काली मेंघन बरसे भिंगे फिजाऐ कहते है, बन्दे सभी पंख मिले तो उड़ चले हम आसमान की ऊंचाई में, ईरादे टूटी हुई ब
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हम बच्चें
हम बच्चे मन के सच्चे नहीं किसी से लड़ते हैं। पर,कभी-कभी किसी बातों पर आपस मे बहुत बिगड़ते हैं। हम बच्चे जब स्कूल जाते हैं वहाँ भी मस्ती क
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