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चकाचौंध
चकाचौंध से भरी इस दुनियां में अब डर लगता है गरीब होने में। धन्यवाद
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डर लगता है
लोगो को सच्चाई से डर लगता है झूठ से नहीं बच्चों को पढ़ाई से डर लगता है स्कूल से नहीं। धन्यवाद
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जाना ही था
जाना ही था मुझे छोड़ कर क्यों तुम मुझे सपने दिखाए अगर उस सपने को तोड़ना ही था क्यों तुम मुझे अपना बनाए। धन्यवाद
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अफसाना
काश हम तुमसे अपने दिल की अफसाना बयां कर पाते हम तुम्हारे ही रहेगें सदा ए तुमको बता पाते। धन्यवाद
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अजीब
ऐ इंसान भी बड़ा अजीब है मतलब है तो साथ है नहीं तो,हम तुम्हारे कोन है धन्यवाद
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बस तुम्हारा ही
हर जगह हर वक़्त बस तुम्हारा ही ख्याल रहता है तुम्हारी एक झलक पाने के लिए मेरी आंखें नजरे बिछाए तैयार रहता है। धन्यवाद
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हर
जिस तरह हर मौसम की अपनी - अपनी बात होती है उसी तरह हर इंसान के अंदर कुछ खामियां भी होती है। धन्यवाद
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हम पंछी आजाद गगन के
खुले गगन में विचरण मुझे करने दो, गुलामी नहीं सह सकता, अब मुझे मरने दो। मै पंछी आजाद गगन का , अब मुझे उड़ने दो। मै बादाम नहीं खाता , मुझे
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हम राजस्थानी हैं हम राजस्थानी हैं
हम राजस्थानी है, हम राजस्थानी हैं, तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ हैं वह गंगा का पानी है, संसार बगीचे को विकसित करते हम वह माली हैं, जिस पर कृ�
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🤝 प्रखरत्ता का विज्ञान... ✍️
सम्मान गुणों का सामंजस्य, और स्वेत्त मेखला सत्य हुई! गुण - अवगुणत्ता वंचीत्त कर - कर, शीक्क्षाविद मार्ग प्रशश्त्त ह�
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हंसी से बड़ी कोई खुशी नहीं
लिख दिया मान लो कुछ नहीं, स्वप्न छोटा था मगर नींद पूरी नहीं। अपनों के लिए बहुत है यहां, मगर दूसरों के लिए आंख रोती नहीं। वो दीपक हूं जो �
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शब्दों की माला से
शब्दों की माला से, गूंथा हर क्षण को। जीवन ऐसा उछल पड़ा जैसे जल तरंग हो। हार जीत को माना रण का अंतिम हथियार। जीत सकेंगे वही तो, छल ना सक�
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