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जो ख़ुदा को रखते हैं दिल के हुज़रे में वो परिंदों को क़ैद नहीं करते पिंजरे में - त्रिशिका श्रीवास्तव धरा' कानपुर (उ.प्र) read more >>
Technology की देन तुम थे वरना इस भीड़ में, एक दूसरे से परे इस दुनिया में, शायद ही कभी हम टकराते, हाँ शायद टकराते भी, पर रुक कर आँखों से आंखें शा� read more >>
यहां ज्यादा की जरूरत नहीं थोड़े में गुजारा होता है। जहां ज्यादा मिले वहां सब बिखरा हुआ होता है। ** *** ** *** ** *** कौन बटोरेगा वो बिखरा ह� read more >>
विस्तार... कहीं किसी रोज उस किनारे के उस पार वजती है सुमधुर ध्वनि, र्कणप्रिय लिए विस्तार करती मन के संताप दूर शनै शनै...! जब भी उठती ह्द� read more >>
तुम्हारे हिस्से की वह हरी,पीली, लाल, काली,चूड़ियों के वे टुकडे़ आज भी रखे है ...! तुम्हारे लिए... जिनके लिए तुम लड़जाया करती थीं, अपने तेज read more >>
ढलती शाम...शीर्षक कौतुहल से दूर ढलती संध्या , समेटती प्रकृती अपने करतलों को...! घर जातीं गाय धूल उडा़ती , बछडो़ को पाने सुख रभांती ..! आसम� read more >>
ज्ञान अनमोल खजाना है बांट सका है कौन इसे ? न भाई बंधु जमाना है अनमोल रतन है हर रत्नों में पर इसको नहीं छुपाना है ज्ञान की ज्योति जले घ� read more >>
रामदयाल बहुत गरीब था वह एक मजदूर था , मजदूरी कर अपना परिवार चलाता था।तेज धूप हो या बारिश वह कभी अपने काम से जी नहीं चुराता था ।उसके परिव read more >>
अक्सर इक सवाल ज़ेहन को सताता है इक ज़ख़्म भरते ही दूजा क्यों मिल जाता है राहत मिलती है उन के छुने से मुझे चारागरों का कोई इलाज़ काम नह� read more >>
बाल कविता "सुबह सवेरे" हुआ सवेरा चुन्नू मुन्नू मोना को जगाते हैं बंद पड़ा है दरवाजा घर की घंटी बजाते हैं ll सुनकर घर की घंटी � read more >>
लड़का:- उफ़्फ़ क्या दिलकश नज़ारा हैं कितना प्यारा अच्छा लगता है बरसात के बूंदें हल्का - हल्का हल्का - हल्का धूप उफ़् read more >>
मुफ्त मिली हुई हर चीज तुम्हें सिर्फ दर्द देगी लेकिन खुशी नही जिसे मोहब्बत कहते है। read more >>
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