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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब का सब एक दूसरे के खुदा बने हुए है। लेकिन खुद को खुदा कौन बनाएगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सिगरेट के तरह जिंदगी हो गई है जो धीरे धीरे कर जिंदगी खत्म हो रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कोई किसी का हमदर्द नही है यहां क्योंकि तुम खुद किसी के हमदर्द नही बन पाए तो लोग तुम्हारी हमदर्द क्यों करेंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मेरा अपना कुछ भी नहीं है एक जिंदगी मिली है बो भी खोदा की दी हुई अमानत है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मोहब्बत और फोन दोनों का कैनेक्शन सेम है क्योंकि दोनो का प्रोब्लम वहां से बिगड़ता है जहां तक लोगों की नॉलेज नही होती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
हफ्ता में एक दिन 2 रीकात नमाज पढ़ने लिए लोग ऐसे घर से निकलते है जैसे उसने जन्नत खरीद ली है।बाकी का छह दिन बोनस के तौर पर पेंशन में मिला �
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मैं मोहब्बत करके आबाद नही हुआ हूं।बल्कि अपनी ही जिंदगी को बर्बाद करने के लिए रातों की नींद को उसे के पास गिरवी रख दी है।
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब उसे समझदार कहूं या बे बकूफ की जो जन्नत देने के लिए आजान देकर बुलाई जाति है फिर भी उसके तरफ कोई नही लौटता है।लेकिन अगर ऐलान कर दो की
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आजान होती रहती है किसी को कुछ फर्क नही पड़ता है किस लिए बोलाई जा रही है।लेकिन अगर जन्नत बांटने के लिए ऐलान करा दी जाए तो सबसे पहले लाइ�
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
देख मेरी बहना तेरी इज्जत ही तेरी जिस्मों का गहना है।उसे मोहब्बत करके एक गैर के लिए उस पे दाग मत लगाओ।
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गजल
शहर से निकले कि वे शहर हो गए , घड़ी भर न संग ले बेखबर हो गए। अब तो पूछा किये किस गली में हो तुम, हर अंधेरे से बढ़कर रोशनी हो गए। शायद नहीं थ
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मानव कितना दीन हो गया
मानव कितना दीन हो गया बड़ा संवेदनहीन हो गया आगे बढ़ता जाता है मुड़कर नहीं देखता उसको जिस पर चढ़कर खेली आनंदो की होली। मानव कितना दी�
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