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जोश जवानी झांसी की तू भारत की अभिलाषा थी"
धन दौल्त कब मांगा उसने हां नारी प्रेम पुजारी थी। क्यों समझें हम अबला उसको वो सदियों से महारानी थी।। हम सत्य शील की बातें समझें अनुसु�
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शीर्षक (भगवान शिव)
शीर्षक (भगवान शिव) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) डम-डम डमरू बाजे भोले नाथ शिव शंकर नाचे। जटाओं में उनके गंगा विराजे। माथे पर उनके चन्�
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## पिता ##
* पिता * सुखी उसी का जीवन है जो प्यार पिता का पाते हैं । अपने अनुभव और धैर्य से परिवार का रथ ये चलाते हैं ।। अपने जीवन में श्रम करके परि
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रूप परिवर्तन
ग्रामीण बाप बेटे पहुंचे शहर की ऊंची इमारत में लिफ्ट के दरवाजे खुल बंद हो रहे थे देखा एक बूढ़ी औरत लिफ्ट के अंदर गई थोड़ी देर बाद द
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Hopeless 💔
पराए जानते है कि मैं किया चाहता हूं, अफसोस तो इस बात का है कि मेरे अपने अनजान है!
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प्रतीक्षा
तरस रहे नैना पिया मनवा अकुलाए सावन जस भीगी रतिया फूलन झुलाएँ बिन झपके पलकें राह तके नैना मद भरा बसंत नहीं पतझर बन जाए मीत प्रीत प्य�
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ਗ਼ਜ਼ਲ
ਗ਼ਜ਼ਲ ਤੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾ ਮੈਨੂੰ ਨਜ਼ਰ ਅੰਦਾਜ਼ ਕਰ ਆ ਬੈਠ ਦਿਲ ਦੇ ਤਖ਼ਤ ਤੇ ਅਤੇ ਰਾਜ ਕਰ ਨਾਗਣ ਵਾਂਗ ਹੈ ਡੰਗ ਰਹੀ ਹਰ ਅਦਾ ਤੇਰੀ ਨਾ ਜਲਵਾ ਦਿਖਾ ਨਾ ਐਨਾ ਮਜਾਜ਼ �
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सावन बिदाई
सावन बीता थम गए सेरे गरजे बादल भादो बरसे गौरी गई ससुराल पिया संग डालन से खुल गए झूले | अब सुनी गलियन कौन निहारे बरखा में सब बं
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सावन
किसलय सा तन है मेरा सखी आज यह कुंभ लाने क्यों लगा सावन की रिमझिम बरखा में है अंग अंग बल खाने लगा इसको मां की ममता समझूं या समाज ने रचा
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💖 अमन विश्व का तारा ✍️
ऐ ज़मी शाहे वतन, आप पे दिल कुरबान है! कुरबान ज़ान भी गुल को तेरे, जिससे वतन गुलज़ार है!! है नुतन प्रभा का यहां सवेरा, औ
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💖 अमन विश्व का तारा ✍️
ऐ ज़मी शाहे वतन, आप पे दिल कुरबान है! कुरबान ज़ान भी गुल को तेरे, जिससे वतन गुलज़ार है!! है नुतन प्रभा का यहां सवेरा, औ
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# अव्यक्त ...
# अव्यक्त ... हुआ बहुत ही धोखा , इसमें ऐसा ही होता ...! कहीं-कहीं रात चांदनी , कहीं अंधेरा होता ...! प्रेम ग्रंथ के पन्ने खोलूँ , लिख लूं अपनी �
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