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पर्यावरण दिवस
पेड़ -पौधे लगाओ, आक्सीजन बढ़ाओ, वातावरण को शुद्ध बनाओ।
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रौनक (प्रेम पर कविता)
कविता-रौनक (प्रेम पर कविता) फिर वही रौनक बचपन की, ताजा हो गयी देख कर अचानक बहुत दिनों बाद शादी के महफ़िल में, निकल कर आगे देखी पलट कर ज
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मेरा गांव
मेरे गांव की अमर बलिदानी मिट्टी। मेरे पूर्वजों की अमर कहानी। मेरे पूर्वजों का इतिहास दबा हुआ मत पूछो ऐसे बलिदानी। जिन की अमर कहानी।
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पृथ्वी
विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष की थीम पृथ्वी (भूमि )पर कविता * पृथ्वी * हमें भूमि और प्रकृति को मूल रूप में लाना होगा । लि
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वेज पुलाव
वेज पुलाव बनाने के लिए हमे चाहिए पुलाव चावल 500 ग्राम, हर मटर 250 ग्राम, गाजर 2 से 3 , अदरक पेस्ट 2 चम्मच लहसुन का पेस्ट 2 चम्मच, तेल 6 बड़ी चम्मच, �
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आपके बिना
सच कहु तो जब तक आपसे बात नही होती। दिन की शुरुआत नही होती जिन्दगी मे कभी हम से खफा मत होना क्युकी आपके बिना इस चेहरे पर मुस्कराहट नही ह�
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क्यों डरु मैं काल से
बक्त हैं की रुकता हैं दुःख हैं की टलता नहीं जख्म अभी तजा हैं एक समय है की बदलता नहीं सदियां गुजर गई कितनी घड़ियाँ गुजर गई न ये बदला म�
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ये ऋ सुन तो
ये ऋ सुन तो दिल में कुछ तो होता हैं तुझे न देखु तो नैना बिचलित होता हैं ये ऋ सुन तो मुझ मे तू ही रहती हैं नहीं तो क्यों होता बेचैन मैं
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पिअबा हमर रंगरेज
पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी ताड़ी जब अबेला घरबा करेला मन मानी रात भर सताबेला मांगेला बार बार पानी पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी त�
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एक है दिल
एक है दिल, सौ तमनाऐ है किस,-किस को पुरी करू, समझ में ना आऐ है
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दिल सुकून चाहता है
हर वक्त हर पल बदलते हुए इस जमाने में एक ठहराव चाहते हैं जमीन पर रहते हुए भी अपना एक आसमान चाहते हैं हर पल हर वक़्त बदलती हुई जिंदगी �
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बचपन की याद
हम, स्कूली शहज़ादे। काज चबी पैवंदी कमीज़, कुछ हंसकर कुछ रोकर। तह कर सिरहाने रखते, नदी खार में धोकर। चुग़ली करते अंगूठे, जूतों से बाहर झ
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