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तपिश
तपिश शब्द गर्मी की पराकाष्ठा को हमारे मानस पटल पर चित्रित करने के लिए पर्याप्त है। भारतवर्ष में तपिश अप्रैल से जुलाई तक अपने उग्र रूप
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व्यर्थ ईच्छा* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.....करण सिंह
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *व्यर्थ ईच्छा* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.....करण सिंह 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 ➰जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पै
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शीर्षक (गर्मी)
शीर्षक (गर्मी) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौसम का हाल ना पूछो गर्मी से है बहाल ना पूछो। ऎसी कूलर सब आन है फिर भी घर में बहोत तापमान ह
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गर्मीयों का मोसम है
गर्मीयों का मोसम है पसीने से भीग मत जाना दो पल की जिन्दगी हे मुसाफिर तुम भूल मत जाना /
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असली दोस्त वो
असली दोस्त वो नहीं जो Block कर दे असली दोस्त तो वो हे जो दु:खो में दोस्त का साथ दें /
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अलफाज भी तुम्हारे
जब तुम औरों से बोले तो तुम्हें अच्छा लगा मेरा बोलना तुम्हें इतना कड़वा लगा की अलफाज भी तुम्हारे Block शब्द में मिले /
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तू मिला होता तो
तू मिला होता तो रिश्ता ना टूटा सा लगता तेरे ना मिलने से अपना मन Block सा लगता /
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लोगो का अजीब रिश्ता है
लोगो का अजीब रिश्ता है शब्द भी बोलते पर Block करने वाले/
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जिसे अपना समझ के
एक तूम ही तो वो जिसे अपना समझ के बोलना चाहा था पर तुमने तो हुमे अपने phone से ही Block कर दिया/
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पढी-लिखी लडकी रोशनी घर की
पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की जिधर भी जाए घर को रोशन करती एक नहीं वो कितने घरो का मान बढ़ाएं मन में है लाखो राज वो उन्हें दबाये बँधी है व
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जिंदगी
ए जिंदगी थोड़ा धीरे धीरे चल पीछे काफी कुछ छूट गया है मुझे उसे उठाकर लाने का कुछ समय तो दे न जाने क्यों तुम इतनी तेजी के साथ मेरे हाथों से
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शीर्षक (जिन्दगी और मौत)
शीर्षक जिन्दगी और मौत मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौत तो यूँ ही बदनाम हैं। लोग तो जिन्दगी से परेशान हैं। जिन्दगी हर रोज़ लाती एक नय
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