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ओ! मेरी लाड़ली ओ! मेरी नन्ही परी डरी थी मैं जब तु आई थी परी डरे थे तेरे बाबा भी तु जब आई थी परी ज़माने की गंदी निगाहों स read more >>
कविता-ख्याल ख्याल आता है क्षण भर के लिए न जाने क्यों रुकता नहीं पल भर के लिए भूलता नहीं भूल पाता नहीं हूं वह रिस्ता जो पहली बार पहल� read more >>
तमीज तो देखो मेरे इश्क की उसे पाने के लिए मैनें तावीज़ पहना है read more >>
माजीद को याद करूं यह मुस्तकबिल के ख्वाब बूनुं तू ही बता , खुद को तेरे पास कसे महसूस करूं read more >>
कुछ बताना है तुम्हें मेरे बिना बोले सुन पाओगे क्या इश्क होने का दावा करते हो तुम अगर मैं कभी मजबूर हुई तब अकेले निभा पाओगे क्या चुनना read more >>
जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये वो चाल ही क्या ? जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे वो रफ्तार ही क्या ? जो चहरा देखकर मुँह फेर ले वो प्यार read more >>
सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम। गुलामी, तुझे सलाम। कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है। कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है। क read more >>
जवानी बेदाग़ गुज़र जाए, उसे ही गुज़रना कहते हैं। उम्र के अनुसार सुधर जाए, उसे ही सुधारना कहते हैं। घर पर अपनों के बीच मरे, उसे ही मरना क� read more >>
✍🏻प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर......करण सिंह💐 *आज की प्रेरक रात्रिकालीन कहानी *जन्मों का कर्ज* एक सेठ जी बहुत ही दय� read more >>
कल्पनाओं में सफर सभी करते हैं। लेकिन मायने हकीकत के होते हैं।। बाजार में हर एक चीज बिकती हैं। मोल-भाव वहाँ जरूरत के होते हैं।। हर आद read more >>
शीर्षक (माँ की ममता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) इस धरती पर जब मै आया गोद म read more >>
गर माँगने से सबकुछ, मिल जाती हमें खुदा से । तो इस जहां में कर्म की, कोई प्रधानता ही ना होती ।। मशगूल होते हम सब भी, बस दुवा मांगने में । read more >>
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