हाये बेचारी अबला नारी,
दहेज प्रथा की कैसी ये बीमारी,
ना मान मिला ना सम्मान मिला,
रोती आ रही है नारी,
आंखों में भरकर नीर,
सब सहती आ रही है � read more >>
उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>
उसका नाम रतन था, लोग उसे काबुलीवाला, इसलिए कहते थे, कि उसके मासूम दिल में, सबके लिए प्रेम था, और उसने एक दिन_ अपनी जाने निछावर कर दी_ यह दर् read more >>
कल का पता न पल का पता, बांधता मन-मन की।
जवानी के झाग झांवर गए, रेनी मैली भवन की।
ठान खोदता, आन अज़माता, सुध न रही कंचन तन की।
तेरा, मेरा मिट read more >>
ना लौट कर आए वो
बचपन के दिन,
कितने खुश रहते थे हम,
वे बचपन की सहेली,
कैसे बनी रहती थी हमजोली,
बे बचपन के खेल बड़े होते थे
मजे जोर,
वो टॉफी ,� read more >>
उस दिन को हम कभी भी नहीं भुला सकते_ वह एक सांड था, जो दिखने में बहुत ही खतरनाक था_ लेकिन उसके दिल में प्रेम था_ हमारे भावनाओं को समझता था_ य� read more >>
सही को सही बताने में !
क्यों इतना हिचकिचाते हो !!
गर उड़ान भरी विश्व गुरू की !
क्यों पर कतरना चाहते हो !!
धारा 370 हटाकर !
नहीं हुआ महापाप !!
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यह लगभग, 40 वर्ष पहले की बात है,
वह गांव का प्रधान था, उनकी हुकूमत से, हमारा गांव के लोग, कांपते थे
सारा गांव का जमीन, उन्हीं का नाम था, आस-पा read more >>