हे ! मज़हबी मानव तेरे कितने रूप और रंग
हम समझ ना पाए तेरे जीवन जीने का ढंग ।
आतंक दंगे-फसाद धर्म की आड़ में आखिर अभी कितने,
न जाने इस आग की � read more >>
छोटी सी उम्र से सपने बुने.
सपनो की मंजिलों के रास्ते चुने.
एक मंजिल नहीं तो’
दूसरी की आशा में चल दिए;
हर कदम बढ़ने पर पैर छलनी हुए.
हा read more >>