राम की राह देखत - देखत, पुष्प सजावत रोज है सबरी ।
राम के नाम को जपत - जपत, बैर को खावत रोज है सबरी ।
राम के नेह में डूबे - डूबे, पंत निहारत है read more >>
शब्द - शब्द मे समझ छुपी, पर समझ न पाए कोए ।
वो शब्द ही क्या शब्द है, जिसे समझ जाए हर कोए ।।
कवि शब्द -शब्द मैं कह गए, रटत बनत न बात ।
बात - बनत� read more >>