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इंतज़ार...!!
रंग-बिरंगे ऐ कागजों की दुनिया में, मैं सादगी की तलाश में हूँ..! मुझें पता हैं तुम वापस लौट कर नहीं आओगी, और मैं तुम्हारें इंतज़ार में हूँ...!!
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मन वेडे स्वप्न पाहू लागले
फारसी दिसण्यात सुंदर नाही, नाहीच तिच्यात तसले काही. फक्त वाहत्या नदीचे पाणी, नि खळखळ आवाज कानी. वर्णन तिचे असेच काही, फुलांचा सुगंध �
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समय की सोच
यह अनुभवियों का कहना, सबसे भला कभी नहीं रहना। सबसे भले के चक्कर में, खुद का भला जाते भूल। सबसे भले रहने वाले के, पीछे उड़ती राख- धूल।
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सुख शांति का अलख जगा दे सारे जहां में
कहते हैं- लोग हिंदुस्तान सारे जहां में, सुख-ए-शांति का- अलख जगा दे सारे जहां में, संत समागम हरि कथा- ज्ञान-ध्यान का योग बता दे.... कहते �
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वतन मेरा प्यारा वतन
दुनिया से- न्यारा है मेरा यह प्यारा वतन दुनिया से- प्यारा है यह मेरा न्यारा वतन जगत में अलख- जगाता शांति का पाठ पढ़ाता जगत को- राह �
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भारत मांँ
मैंने यह सिर लिखा है वतन के नाम प्रेम दिल में लिखा भारत मांँ के नाम -मोती
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कभी मैं सोचूं
शीर्षक ___कभी मैं सोचूं? कभी मैं सोचूं मैं भी लिख दूं ? इन वीरों की गाथा! न जाने क्यों? लिखते, लिखते मन बेचैन हो उठता ! कभी मैं सोचूं! क्
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कृतज्ञ
शीर्षक ____कृतज्ञता देश के लिए जो मर मिटे! उन वीर शहीदों की ! कुछ बात होनी चाहिए ! जो अभी तक न सुनी ! कुछ ऐसी आवाज होनी चाहिए। दुश्मनों �
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वीरों को नमन
शीर्षक। ____ वीरों को नमन! अंधकार भरी रातों में जो सीमा पर दीप जलाते हैं ! ठंडी गर्मी की परवाह किए बगैर जो सीमा पर सीना ताने खड़े रहते ह�
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वर्षा का नज़ारा
मौसम ने ली अंगड़ाई, देखो वर्षा ऋतु आई। उमड़ घुमड़कर बादल छाए, बोले मोर पपीहा। जानें किसको, किसकी याद सताई, चलने लगी पुरवैया। बूंद �
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हंसना रास न आया
जग को हँसना रास न आया । जग को यह स्वीकार कहाँ था ब्याहे जाएँ सपने मेरे छोड़ चन्द्रिका राजभवन को ले मेरे मंडप में फेरे करे उजाल�
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मंदिर चले हैं
चेहरे को किमती इतर में डाले सज धज के मंदिर चले हैं, मन का मैल तो धूली नहीं है फिर भी प्रभु से मिलने चलें हैं।
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