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अपने ही दिल दुखाते है
गेरो से दिक्कत नहीं, दिल तो अक्सर अपने ही दुखाते है, बस एक अफसोस यही है कि, जिस-जिस को अपना माना, वो अपने कदम-कदम पर दिल दुखाते चले गये।
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सिर झुका बैठा हूँ
जमाने की धूप से तपकर अब बराद के छाँव में बैठा हूँ शहरो मे सकून कहा इसी लिए गाँव में बैठा हूँ परिवार क�
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सही बात
बड़े नसीब से ऐसे दोस्त मिलते हैं जिन्हें लाख बार भी पुकारो सुनते नहीं हैं और अपनी जरुरत पड़ने पर धड़ाम से हाजिर हो जातें हैं।
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सोचा न था एक दिन ऐसा भी आएगा
सोचा न था कि एक दिन ऐसा भी आएगा, मेरा जिगरी कहा जाने वाला, मेरा फोन भी नहीं उठाएगा, सोचा न था कि एक दिन ऐसा भी आएगा, मेरा जिगरी मेरे सामने �
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अजीब लोग
यह क्या मज़र देख रहा हूँ में, अजीब से है लोग यहां, जीते जी हाल-चाल न पूछने वाले मोहब्बत जताने आ रहे है, मरने के बाद।
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में नफरतों का खरीदार नहीं
अगर मुझे समझना आसान होता, तो काफी लोग समझ जाते, कि में नफरतों का खरीदार नहीं, बल्कि में नफरातों की दुकान पर, अक्सर मोहब्बत का सामान बेच�
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मोहब्बत-नफरत
में इस दुनिया में मोहब्बत करने आया हूँ नफरत नहीं, यही वजह है कि मुझे जिनसे नफरत करनी चाहिए थी, में उनसे भी मोहब्बत कर बेठा।
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बदलता वक्त
अब ढुढ़ रहे है वो हमसे मिलने के बहाने, एक वक्त वो था जब हमसे मिलते भी नहीं थे।
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माँ
माँ एक बेशकिमती तोहफा है, और बेशमिती तोहफा आम तौर से नहीं, बड़ी ध्यान से रखा जाता है, इसी तरह माँ कि इज़्जत आम तौर से नहीं, बेइन्तेहा अजी
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नज़रो से बातें
न जाने कैसे नज़रो ही नज़रो में बहुत कुछ कह जाती हो तुम, और एक हम है जिन्हें अल्फाज़ों में भी समझाना नहीं आता।
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कड़वा सच
छोड़ दिया मुझको आज मेरे अज़ीजों ने, दलिल यह दि कि में सच बहुत बोलता हूँ।
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मेरी बुरी आदत
कुछ आदते बुरी भी है मुझमें, लेकिन तुझे याद रखने की एक बुरी आदत, अच्छी हे मुझमें।
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