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दुनियाँ में तो ग़मों का महासागर है, पर हम भी तो हर गुण से आगर है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
कयामत की तुम बेमिसाल सूरत हो, आब की तुम अद्वितीय मूरत हो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:- समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
मेरे लिए तुम कुछ भी कर लो ओ मेरे यार, दुनिया वालों को हैरत में डाल दो ओ मेरे हार। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीप� read more >>
आज इन्सानियत को लगता है किसी ने चुरा लिया है। आज अपना ही अपना बनकर सिर्फ धोखा दिया है। चिन्ता इसका हल नहीं वक्त के साथ सम्हलना पड़ेग� read more >>
प्यार की तुम जीती - जागती देवी हो हृदय की तुम जैसे सूरज की किरण हो । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहा read more >>
तूँ हुस्न के रंगों से लिखी हुई ग़ज़ल है, प्यार के दरिया में खिलता हुआ कमल है। read more >>
मैं उस दौर में हूँ जहां, सबके शामियाने हैं । हर जगह अपने लिए, सबके पास बहाने हैं ।। एक मेरा ही घरौंदा है, जहाँ दीपक जलता है और सभी को तो, ए� read more >>
तुम इरादे बना लो, तो जोड़ सकती हो मुझे। तुम रास्ता बना लो, तो मोड़ सकती हो मुझे।। मैंने कुछ इस कदर कर दिया है, खुद को तेरे हवाले । कि म� read more >>
वो बातों में शब्दों को कुछ ऐसे पिरोता है। कि जैसे हीरे के पानी से मोती को धोता है ।। मैं निशब्द हूँ उसके फलसफा-ए-जिंदगी को देखकर। कि read more >>
अनजान हूँ मैं अपने ही दिल ऐ मिजाज से ये कमबख्त ख़ुद को ही तन्हा कर लेता है ।1। नहीं रह पाता है कभी उसके बगैर फिर क्यूँ ये उससे लड़ाई म� read more >>
नज़रों से देखा उनके तो नजराना अच्छा लगा दिलाएंगी चांद वो बहाना अच्छा लगा यकीन मानिए जब जब हंसी मां मेरी मुझे जमाना अच्छा लगा read more >>
इंसान सदैव सोचता रहता है कि यदि मैं ना होता तो यह कार्य न होता कुछ लोगों को यह भ्रम होता है कि मेरे बिना तो कोई कार्य कर ही नहीं सकता कभी-� read more >>
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