एक थी मैना। पंख फैलाकर उड़ती थी तथा मीठे गीत सुनाती थी। एक दिन वह मीना की टाट वाली झोपड़ी के घर पर बैठी थी। एक बदमाश लड़का उसे पकड़ने की तैय� read more >>
यादें - बचपन की
यादों के उन उधड़े चिथड़ों को
आज भी फिर से जीना चाहता हूं
आज फिर से उस बचपन को जीना चाहता हूं......
कितना आनंदित था मैं
न सोने read more >>
कुछ सवाल - कुछ जवाब
न कोई कलम, न कोई किताब, रखता हूं
पल भर की जिंदगी है यह सोच
न कुछ लेने का, न कुछ देने का, हिसाब रखता हूं........
न अलीशान महलो� read more >>
ऐ जवानी जरा रुक तो
अभी तो तेरी आहट गूंजी ही है,
कहना तो बहुत कुछ है तुमसे
मन की बात मगर.....
अभी तू कहां राज़ी है।
ये इल्म तो था कि तू अभिम� read more >>