थे जब हम चुप्पी साधे,
जब थे बेबस, बेसहारे,
बस चुप करा दिया हमको,
जब कुछ कहने की थी बारी।
आज तो बस आवाज़ उठाने की है हमने ठानी,
न बैठेंगे च read more >>
डर और दर्द दोनों का है नाता कोई ,
है नाता जो दोनों में बहुत गहरा,
तभी तो चीख उठी उस दर्द के मारे,
कह उठी सारी सच्चाई की दास्तां बयां,
इसील� read more >>
जीवन फिर से लौट आया
खेड़ा गांँव के लोग बहुत आलसी थे । वे अपने दिन इधर - उधर घूमने, झगड़ने, सोने और शिकायत करने में बिताते थे ।
एक बार गाँव read more >>