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बचपन की दौड़ बचपन से ही एक दौड़ लगी थी जिंदगी को बचाने की कुछ पाने की कुछ आजमाने की होड़ लगी थी…… कुछ सपने पाले थे कुछ अलग करने की कुछ अ� read more >>
जीवन का सच जिंदगी में हर पल खूबसूरत नहीं होता, बनाना पड़ता है यहाँ कड़वी दवाई भी पीनी पड़ती है यहां मीठे ज़हर को भी आजमाना पड़ता है …………… � read more >>
शब्दों की कीमत आज फिर लिखने का मन है आज फिर बिकने का मन है फिर सोचता हूं……. क्यों लिखूं ? क्यों बिकूं ? कोई खरीदने को तैयार नहीं मेरे श read more >>
एक थी मैना। पंख फैलाकर उड़ती थी तथा मीठे गीत सुनाती थी। एक दिन वह मीना की टाट वाली झोपड़ी के घर पर बैठी थी। एक बदमाश लड़का उसे पकड़ने की तैय� read more >>
यादें - बचपन की यादों के उन उधड़े चिथड़ों को आज भी फिर से जीना चाहता हूं आज फिर से उस बचपन को जीना चाहता हूं...... कितना आनंदित था मैं न सोने read more >>
मेरी सच की दुकान कभी मैंने भी एक दुकान लगाई थी बड़ी शिद्दत से सजाई थी….. कुछ ख़्वाब रखे थे कुछ ख्याल रखे थे कुछ सपनों के कोने थे कुछ खुशि read more >>
कुछ सवाल - कुछ जवाब न कोई कलम, न कोई किताब, रखता हूं पल भर की जिंदगी है यह सोच न कुछ लेने का, न कुछ देने का, हिसाब रखता हूं........ न अलीशान महलो� read more >>
मजदूर हूं पर मजबूर नहीं मजदूर हूँ पर मजबूर नहीं पत्थर तोड़ता हूँ पर दिलों को जोड़ता हूँ जाड़े की ठण्ड में ठिठुरता हूँ तपती धूप में झु� read more >>
ऐ जवानी जरा रुक तो अभी तो तेरी आहट गूंजी ही है, कहना तो बहुत कुछ है तुमसे मन की बात मगर..... अभी तू कहां राज़ी है। ये इल्म तो था कि तू अभिम� read more >>
सोनल परी एक परी थी। उसका नाम सोनल था। वह बहुत सुंदर थी। उसके पास एक जादुई छड़ी थी। उस छड़ी से सोनल परी मनचाहा काम कर सकती थी। सोनल परी को read more >>
हंस और हंसिनी एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये। हंसिन� read more >>
हवा का खौफ़ है पर ख़ुद को आज़माने दे चिराग़ बुझ गए हैं जो मुझे जलाने दे हयात यूंँ भी ज़मीनों से तंग है साक़ी तेरी निगाह के प्याले में � read more >>
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