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कितने पागल थें हम अंधकार में रोशनी को तलाश रहे थें भला कभी कोई बुझ कर भी जलता है क्या धन्यवाद read more >>
एक औरत मर्द के लिए सब करती है पर मर्द को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उनलोग की सोच ही वैसी है कि औरत है तो उसे तो ए सब करना ही है पर औरत अगर कभी read more >>
कब्र पर मेरे एकबार सनम तू आजा जीते जी तो वक़्त ना दिया कभी अब तो आजा देख कितना दूर चली गई मैं अब तो शिकायत भी ना कर पाऊंगी मैं अपने हाथ� read more >>
कुछ समय पहले तक ऐसी उदासी न थी चारों ओर ऐसा सन्नाटा ना था मुर्गे की आवाज से पक्षियों की चहचहाट से होती थी सुबह शुरुआत न जाने कहां से द� read more >>
बात उन दिनों की है जब हमारी शादी एक संयुक्त परिवार में तय हुई। मुझे पहले से ही पता था कि मेरे पति अपने माता-पिता अपनी दो बहन दो भाइयों के read more >>
वफा माँगी थी अब क्या दगा दोगे। साथ दिया नही तुने किसी का अब तुम किससे वफा माँगोगे। अब डूब रहे हो तुम किसका साथ माँगोगे। मौका दिया नह� read more >>
घर के देख हालातों को खुद से ही मैं रूठ गया हूँ ज़िम्मेदारीयों का बोझ लिए आज कमाने निकल गया हूँ। पसीने से कपड़े हैं लतपत हाथों पर मेह read more >>
एक हसरत- मन में उठी, जब से तुम्हें देखा है,, ये आया- चैन दिल को, जब से तुम्हें देखा है,, सुकून में- गुज़रते अब हर पल, जब से तुम्हें देखा � read more >>
रुप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वालों के लिहाज बदले बदल गया यह पूरा जमाना मुसीबत आई जब एक अबला पे सबके राज बदले मानवता शर्मसार हुआ read more >>
मानवता शर्मसार हुई जब एक अबला लाचार हुई रूप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वालो के भी लिहाज बदले रोती बिलखती मदद की गुहार करी सबने म� read more >>
शाम लगभग नौ बजे एक दिन निकला सड़क पर शाम लगभग नौ बजे मैं गया कुछ दूर देखा सब्जियां कुछ थे सजे, टिमटिमाते मोमबत्ती की उजाला के तले बे read more >>
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा� read more >>
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