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दुआ मांगते भी क्या खुदा से
दुआ मांगते भी क्या खुदा से जब उसी ने मिलाके हमें उसी ने अलग कर दिया कुछ सोचा ही होगा ऐसे ही हमें किसी और का होने तो नहीं दिया होगा ना
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फरियाद करके थक गया ए दिल
फरियाद करके करके थक गया ए दिल ए खुदा तू मेरी सुनता नहीं क्यों क्या तुझ तक मेरी पुकार जाती नहीं यह जा कर भी सुनना नहीं चाहता
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जिंदगी क्या होती है
मौत के पहलू में आकर जाना जिंदगी क्या होती है जिससे मुंह मोड़ रहे थें हम वही जीने का वजह होती है मैं जानती हूं तूने रुलाया बहुत है पर �
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चली जाऊंगी मैं तेरी जिंदगी से
चली जाऊंगी मैं तेरी जिंदगी से तू खुश रहे अपनी दुनियां में यही दुआ हमारी रहेगी रब से माना कि तुझपे हक नहीं अब मेरा पर उस प्यार का वास्�
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काश मुझे तुम मिल जाते
काश! मुझे तुम मिल जाते तो ऐ दुनियां हंसी लगने लगती तेरे बाहों में सर रखकर मैं भी इस जहां में खो - सी जाती ऐ खुदा ऐसा कौन सा गुनाह मुझसे ह�
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रिश्ता अमरता का
कल, जब मैने उसे उदास होते देखा। तब, मन मेरा भी उदास हो गया । खड़ी ,घंटों तक, एक तस्वीर से बतियाते रही। कुछ सवाल थे। थोड़ी शिकायते थी। �
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सितारों मे दुर -कोई एक सितारा
सितारों मे दुर , कोई ,एक सितारा मुझे , वो, ईशोरों से दिखाती है। मे अनजान, अजनबी अपना समझ के मुझे वो पास ,बुलाती है। कसै ये दिल,करे हर बार
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राजकुमारी मंजुलिका
उपन्यास राजकुमारी मंजुलिका भाग - 2 गुप्त तहखाना शाम का वक्त होने को आ गया है। फिरोजगढ़ रियासत के महल के चारों और बहुत से सिपाही चौकने
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राजकुमारी मंजुलिका
उपन्यास राजकुमारी मंजुलिका भाग - 1 विनोद सिंह - एक आफत दोपहर का वक्त है। विजयगढ़ के किले के चारों और एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है। अजीत
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ये वक्त तुम्हें बताऐंगा
लोगों को समझने के लिए जरा रिस्क उठाईए । कितने ,दंगाबाज है। लोंग यहाँ। ये वक्त तुम्हें बताऐंगा ।
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अवसर-संघर्ष की कुछ कीमत नहीं
ये जिन्दगी पा के लोगों ,से बहुत कुछ सिखा है। हमनें इतना ,व्यर्थ है। यहाँ, हर एक जीवन जीने का पैतरा संघर्ष की कुछ कीमत नहीं , अवसर ,अवसर
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सत्य पर पर्दा था उठा दिया पर्दा कोई
"सत्य पर पर्दा था कोई.. उठा-ए-दिया पर्दा कोई.. सजा-ए-मौत देखो फिसल गई,, सत्य-ए-जीवन अमर कर गई"!!!! -मोती
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