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पंचतत्व बना ये देह-आओ करें ज्ञान की बातें
पंचतत्व बना ये देह, ता बोले एक हंस। पंचबली ए-महाभूत, जब फेरेगा काल।। टूटेगा बसेरा ए-मन, ता बोले एक हंस। साथ यम के चले ए-मन, ए-पिंजरा तब
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क्यों दिल उसी से उम्मीद लगा बैठता है
क्यों दिल उसी से उम्मीद लगा बैठता है जो हमारे उम्मीदों को तार तार करता है क्यों दिल उसी का चेहरा देखना चाहता है जो हमारे चेहरे को नपस�
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सड़क-ऊबड़-खाबड़ या समतल
ऊबड़-खाबड़ या समतल, चमचमाती चाहे रज ओढ़ी। मिट्टी, गिट्टी की बनी, चाहे सीमेंट रोड़ी। चले गंत्रिका मोटर गाड़ी, चाहे सीर की जोड़ी। चले र�
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प्रधानमंत्री के दावेदार
अभी विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस की खिचड़ी भली-भांति पकी नहीं है, उसमें नमक, तेल, मिर्च और मसाला पूरी तरह स
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यादों का झुरमुट खोल सखी-तेरे मन को बहुत ही भाएगा
यादों का झुरमुट खोल सखी तेरे मन को बहुत ही भाएगा जो भूल रूठा है तुमसे याद सहज आ जाएगा। मैं को मै से मत छीन सखी तेरी आदत में आ जाएगा तू ट
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ख़्वाब न बनता हक़ीक़त युग-युगत कर हारा
ख़्वाब न बनता हक़ीक़त, फिर क्यों फिरे मानव? युग-युग हारा युगत कर, फिर क्यों फिरे मानव?? ख़्वाबों का नाता ए-जग, फिर क्यों फिरे मानव? सत्
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धन से प्रेम-धन भ्रष्टाचारी निर्दय दुष्ट कातिल मतलबी भी बनता
खुशियां साथ लाता, निश्चित मौत को भी दूर भागता, धन की कदर करने वाला जीवन में सुख आनंद पाता, सोने चांदी की थाली में खाता, अपनी तंदुरुस्ती ब�
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अभी वो याद आते हैं-कभी जो याद करते थे
कभी जो पास थे इतने अभी वो दूर हैं कितने कभी जो खास थे मेरे अभी ना पास हैं मेरे कभी जो थे मेरे अपने अभी वो हैं मेरे सपने कभी जो याद कर�
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शब्द अर्थ को तौलकर- कहिए अपनी बात
शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। सुरभित हों तब जगत में,सुहावना हो रात।। शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। रहिए हरदम मग्न हों, रहे स्
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मुमकिन है सब कुछ यहां-सिर्फ चाह हो यार
(कुंडलिया छंद) मुमकिन है सब कुछ यहां,सिर्फ चाह हो यार। नेक दुआ लेंगें सदा,देंगें सभी दुलार।। देंगें सभी दुलार,मात दूं सदैव दुश्मन। स�
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तेरी मेरी प्रेम कहनी-खुशी के चाँद चमकने लगे
तेरी चाहत से मेरी दिल की धडकन धडकने लगे खुशी के चाँद चमकने लगे यही तेरी मेरी प्रेम कहानी है मेरे दिल की धडकन कहे आ सनम लग जा गले दिल �
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खोया खोया चांद था-सुखद मिलन की रात
(कुंडलिया छंद) खोया खोया चांद था, सुखद मिलन की रात। शीतल मधुर बयार थी, रिमझिम सी बरसात।। रिमझिम सी बरसात, प्रेम की अगन लगाये। जोड़ा बैठ�
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