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(कथन) भूख की तड़प से बच्चे खतरनाक बन सकता है, समाज के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए कहीं भी भूख की तड़प सबके लिए शर्म है। इसके read more >>
(कथन) भूख की तड़प मिटाने के लिए शिक्षा जरुरी है, बिन शिक्षा ये तड़प बरकरार रह सकता है। भूख की तड़प अभी भी होना शर्म की बात है, कहीं तो पर� read more >>
(कथन) विकास कि ऊंची उड़ान तो हम भरें हैं, लेकिन भूख की तड़प अभी भी यहां है। शिक्षा के अभाव में अभी भी कुछ दयनीय हैं। जो मानव समाज लिए घोर read more >>
(कथन) सर्वप्रथम तो रोटी ही आवश्यक है, उसके बाद कपड़ा और मकान। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
सब रिश्तों को ढूंढ कर परखा है अपनी जज्बातों में पर मां के जैसी किसी को नही देखा केयर करने बाला। read more >>
(मुक्तक छंद) बीते दिन वनवास के, बहुत उठाए कष्ट। खुशी मिली तब राम को , दुष्टों का कर नष्ट। धर्म ध्वज का जय हुआ, खुशी अयोध्या धाम_ प्रजा उत् read more >>
तुमसे दूर हो कुछ भाता नहीं है। झिलमिल दिए बुझने लगे हैं मन में दीया जगमगाता नहीं है। कैसे मधुप ने नई राह चुन ली मुझमें धैर्य अब समाता � read more >>
तुमसे दूर हो कुछ भाता नहीं है। झिलमिल दिए बुझने लगे हैं मन में दीया जगमगाता नहीं है। कैसे मधुप ने नई राह चुन ली मुझमें धैर्य अब समाता � read more >>
एकतरफा प्यार था मेरा ना कभी बता पाया ना कभी जता पाया। और न बो सक्स मेरा हो पाया। read more >>
कविता- हे वेदों के अकाल पुरुष!तुम कौन हो? पद- श्रीहरि भक्ति पद। रस- भक्ति रस छन्द- मुक्तक (मुक्त छन्द) कविता- (१) तुम कैलाशी! तुम अविनाशी! read more >>
हार हृदय की वही कहानी तुम ही तो कह जाते हो। साथ साथ मेरे आकर मुझको ही छल जाते हो। वही वेदना फिर उठ कर जीवन राग सुनाती है दिखा छलावा रूप read more >>
हजारों दीप जल जाए तुम बस मुस्कुराना। निगाहें मेरी थम जाए तुम बस मुस्कुराना। दर्द जब भी बढ़े कि सीना चीर जाए हौसला उससे मिलने का कभी read more >>
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