"यह जो चेहरा दिए-
कई-कई रूप रब ने"
"चेहरा ख़ुद का-
छुपाया दिल तेरे रब ने"
"तू खोजता फिरता-
रब को कई-कई दर में"
"यह दिल-
दरबार उसका रचा रब न� read more >>
(दोहा छंद)
यही बात है सीखना, प्यास न जाने जात।
रहते कांटे फूल सह,करते मन की बात।।
प्यास न जाने जात को,मौसम करे न वैर।
सब पर एक प्रभाव दे,स read more >>