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बुढ़ापे का सहारा सीमा... आखिर बात क्या है कल से देख रहा हूं तुम बार - बार छत पर जाती हो ... कई बार छत से चढ़ते - उतरते हुए देखकर आखिरकार दिनेश read more >>
एक शहर मे सेठ रहता था ! सेठ कभी भी अपनी धन सम्पती पर घमण्ड न किया ! वह एक समाजिक विकास करने के लिए हमेशा तत्पर रहता था !किसी के भी के दुख दर्� read more >>
मेरे घटा तु भुल न जाना पंछी तु उड न जाना हम चल पडे है,खेतो में मौसम बईमान तु चल न आना पंछी अपने घोसला मे खुब चहचहा रही कोयल अपनी बानी स read more >>
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे पिया मिलन को आतुर अंखियाँ, हाय रे ! कब से तरसे रे दरद जिया का सह नहिं जाए, सुध बुध तन बिसराई � read more >>
" पितृ सम्मान " रात के दस बज रहे हैं और तुम अभी तक घर नहीं लौटे ... ?  कल से तुम्हारा बाहर जाना बंद ... ! ! यह कमरे में धुंंआ किस चीज का है ... ? सिगर read more >>
अनमोल धरोहर डैडी... आज आपके रखें नये ड्राइवर ने मेरे साथ बदतमीजी की ... देर शाम लौटी जांहवी ने अपने पापा को बाहर हाल में बैठे हुए देखकर शि� read more >>
जब हृदय उद्विग्नताओं से परिपूर्ण हो जाता है। एवं उसमें और अधिक व्यथित भावनाओं को समाहित कर पाने की पराकाष्ठा नष्ट हो जाती है, तो उर � read more >>
गिरधारि मुरारि पुरारि हरे! नंदलाल अदित्या गोपाल हरे!! बलि बाल अनादि अनंत हरे! अनिरुद्धा हरि मकरंद हरे!! ऋषिकेश हरे! देवेश हरे!! गोपाल� read more >>
(दोहा छंद) शिक्षा के सम्मान से, जगत बनें गुलफाम। करें देश को सबल सब, होत जगत में नाम।। शिक्षा का सम्मान से, मानव करे विकास। खुशियों में read more >>
(दोहा छंद) घोंपे पीछे वह छुरा, उसका यह है जात। दूर्जन से दूरी भली, सदा करे आघात।। दूर्जन से दूरी भली, मन में रखता पाप। करता साथी का बुरा, read more >>
(दोहा छंद) नफा और नुकसान दो,पहलू ही है माप। दिल से कर के काम को, रहें नफा में आप।। नफा और नुकसान से, पहले डर मत यार। धंधा को अब कर शुरू,जी� read more >>
(दोहा छंद) घोंपे पीछे वह छुरा, उसका यह है जात। दूर्जन से दूरी भली, सदा करे आघात।। दूर्जन से दूरी भली, मन में रखता पाप। करता साथी का बुरा, read more >>
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