कुछ आहट लेता हूं, कुछ ख़ुशबू आती है।
यह बहकी-बहकी सी, शाम होती है।।
यह ख़्याल रखता हूं, दिल थामें रखता हूं।
तेरे घर की गलियों से, हर दिन � read more >>
कुछ धनी किसानों ने मिलकर खेती के लिए एक कुँआ बनवाया. पानी निकालने के लिए सबकी अपनी-अपनी बारी बंधी थी.
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कुंआ एक निर्धन किसान के खेतों के � read more >>
वक्त गर आया आसमां के पार हम देखेंगे , वक्त गर आया ओलों की बौछार हम देखेंगे , आंधियाँ भी नहीं मिटा सकतीं रेत पर लिखा मेरे यार का नाम___वक्त � read more >>
लगता है बचपन में हम कुछ ऐसे ही पले गए ,कैसी किस्मत लेकर आए जो ऐसे मनचले भए , हम छले गए यारों ऐसी मोड़ पर___ जहां से रास्ते मरघट तरफ चमचमाते च� read more >>