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मै टूट चुका हूं भीतर से पुरी तरह
आज 8 साल हो जाएंगे तुझको मुझे छोड़ कर गए तुझे क्या मालूम है तेरे बिना मेरे ये दिन कैसे गए दुनियां को सिर्फ मुस्कुराहट ही दिखती है हर बा�
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संभाल ले बाबा कहीं हो ना जाए देरी
बाबा ज़िंदगी उलझ रही है मेरी देख ना क्यों ढील दे रहें हो बाबा कहीं पतंग की तरह कट ना जाए ये सांसें मेरी दुनियां कोशिश कर रही है गिराने �
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जीव अपने अंतर्मन को जानकर
जीव अपने- अंतर्मन को जान कर,, अपने नाशवान रूप- से छुटकारा पा लेता है,, और वह पूर्णता- की ओर बढ़ने लगता है....!!!! -मोती
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परमानंद आपका आंतरिक अस्तित्व में हमेशा मौजूद है
बाह्य परिस्थिति- चाहे जितना विपरीत हो,, परमानंद- आपका आंतरिक, अस्तित्व में हमेशा मौजूद है...!!!! -मोती
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वक़्त की समझ नहीं जिसको वो वक़्त पर ठोकर खाता हैं
वक़्त की समझ नहीं जिसको , वो वक़्त पर ठोकर खाता है। आलस निंद्रा में मदहोश होकर, अपना समय गवाता है। होश तब आता जब वक़्त नहीं, फ़िर कि�
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यदि होता नभ का पंछी मैं
यदि होता नभ का पंछी मैं यदि होता नभ का पंछी मैं दूर गगन उड़ जाता, नन्हें नन्हें उड़-पंखों से गगन घूम कर आता। फुदक फुदक कर खुशियों मन �
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लालची खरगोश।
बहुत पुरानी बात है।रामपुर गांव की सीमा पर एक बुढ़िया अपनी छोटी सी मड़ैया में रहती थी।बेचारी का कोई नहीं था।भीख मांगकर खाती और कभी-कभी गा
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सैलानियों के इस शहर में भृंगी ढूंढता फिरता हूं
सैलानियों- के इस शहर में, भृंगी ढूंढता फिरता हूं ऐ फ़ितरत तू- अपनी रजा तो बता यूंकि- फ़ितरत बदलता है सफार-ए- मंज़िल में यह फ़ितरत ह
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माँ तेरा सहारा हैं
माँ तेरा सहारा हैं, तेरे बिन ना गुजारा हैं, करती हैं सब पर कृपा, माँ दया की मूर्ति हैं। जय माता दी
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मां के जैसा कोई नहीं होता
मां के जैसा कोई नहीं होता, माँ सबसे अनोखी होती है, लगाती है अपने सीने से बच्चों को, सब खुशियाँ देती हैं।
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अपराजिता - जीवन की मुस्कराहट
अपराजिता - जीवन की मुस्कराहट बड़े शहर से शादी करके आई अपराजिता जब से अपने ससुराल एक छोटे से गांव में आई तब से देख रही थी ससुराल में उसक�
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मेरा मैया बड़ी प्यारी है
मेरी मैया बड़ी प्यारी है, सबसे वो निराली है, भर देती है खुशियाँ, ममता लुटाने वाली है। जय माँ लक्ष्मी
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