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अरे इस जमाने का क्या कहना? चेहरों पर चेहरें हैं, सच्चाई अभी भी घोड़ अंधेरे में ही है। अजब तेरी फितरत, गजब तेरी रहनुमा है। बोलना कुछ है, read more >>
तुझ सा नादान कोई सारे जमाने में नहीं, इल्म ना थी तुझे, ना ही कोई अंतर्ज्ञान। तूं समझता रहा बहुत कुछ, पर थी हकिकत कुछ भी नहीं। जब मैं ने ग read more >>
आज व्यक्ति और समाज दु:ख के घनघोर अंधेरों में है । कहीं दु:ष्कर्म है तो कहीं लूटपाट है । कहीं हिंसा है तो कहीं मान _अपमान है । कहीं जात _ प read more >>
जिंदगी की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में , हम बहुत दूर निकल आए हैं , कुछ रिश्तो को निभाते ,निभाते, मैं थक चुकी हूं शायद मैंने इन रिश्तो को, स read more >>
तुम्हें अपनी जिम्मेदारियों से! कब फुर्सत मुझे अपनी जिंदगी की परेशानियां ,एवं गम ,से कब फुर्सत कभी सोचते मिलने जाऊं , तुम्हें ,फिर सो read more >>
न जाने दिल बार-बार क्यों ? कह रहा है !यदि आज के दिन न हम तुमसे बिछड़ गए ! तो शायद ही जिंदगी के ! किसी मोड़ पर ? मेरी तुमसे मुलाकात हो ? यदि मु� read more >>
मैं गोबर भी छू लेती हूं, गईया भी धो लेती हूं, मैं खेतों में,दिन भर काम करके, धूप भी सह लेती हूं, मैं किसान की बेटी हूं..... इतनी मेहनत करके भ read more >>
किसी की आंखों में इतना ना डूब जाना की निकलते वक्त आंख में आंसू आ जाए read more >>
"स्याही" "जब तक देहरूपी कलम में साँसरूपी स्याही रहेगी,तब तक मेरी कलम से निकला हुआ हर एक अल्फ़ाज,तुम्हारी मोहब्बत् का कर्जदार रहेगा" read more >>
वो चोट देकर कहीं बैठा है देखो हम उफ़ भी ना किए तो वो समझे हम खुश है देखो। धन्यवाद read more >>
हद से ज्यादा तुम्हारा हूं! यकीन नहीं- इन आंखों में देख लो तुम्हारी ही छवि- इन आंखों में मिलेगी प्यार तुम्हारा हूं- दिल का रिश्ता है, read more >>
ईर्ष्या द्वेष की भट्ठी बनी- चढ़ी हाड़-मांस की हांडी माया की लगी में जली- काम- क्रोध- मोह- लोभ, अहंकार की लकड़ी मन के चक्रव्यूह में जीव� read more >>
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