जब भी मैं अकेला बैठता हूँ तो,
याद आता है मुझे अपना बीता हुआ कल..
जो झंगझोर कर रख देता है मेरा सम्पूर्ण अस्तित्व..
और डुबो देता है मुझे दु� read more >>
जाने क्यों कुरेधती हैं मन की मलाल,
जो बीत गया हैं दौर ,
जाने वो कौन सा दिन होगा,
जिसमें भूल जाए वो दौर,
आसान नहीं पर नामुमकिन भी नहीं,
थोड read more >>
यह यह कविता अर्जुन शर्मा के द्वारा लिखी गई हैं अगर इसमें कोई भ्रम फैलाने वाले शब्द हो तथा कोई गलत शब्द हो या कोई गलत लाइन लिखी गई हो तो क� read more >>