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कविता - मेरे स्कूल का दूध (एक घटना) दुःख ही जीवन की कथा रही यह सदा कष्ट की व्यथा रही। कब तक कोई लड़ सकता है! कब तक कष्� read more >>
मैं फूल हूँ काटों से लिपटा रहता हूँ कही भी कही भी हर मौसम में मिलता हूँ मैं कोमल हूँ और नाजुक भी मैं फूल हूँ मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद read more >>
मैं फूल तू काटा फिर भी दोनों आधा आधा तू मुझ से दुखी दुखी फिर भी रक्षा करता हैं मैं कोमल नाजुक कली तू निठुर काटा फिर भी दोनों आधा आध read more >>
जिसे धर्म और धन का चिन्तन है वह तो सुबह सवेरे उठता है, उठकरके वह आचमन करके संध्या वंदना के लिए बैठता है। read more >>
जो सदाचार को करता है वह दीर्घ आयु को पाता है, सदाचार से लक्ष्मी, धन परलोक में कीर्ति को पाता है । read more >>
प्रायश्चित या प्रतिशोध (खण्ड-3) दिल्ली में जनवरी का मध्य भाग भयंकर ठंड का समय होता है। तीन दिन से कोहरे के कारण सूर्य के एक पल भी दर्शन � read more >>
मोटी मोटी आंख कटीली रूप निराला से 🌹🌹 जूली चिमटा लिए नाथ बागों में आर्या से 🌹🌹 सूरज चंदा जो मुख चमके फैल रहा उजाला है शीश गंग माथे पर च read more >>
तब तो वो समझदार नही थी पागल तो मै था अब वो मेरी तलबगार नही थी जाने- अनजाने गलती तो उससे हो गयी दो नैन से नैन मिलाने की तब तो वो समझदार नह� read more >>
मन की चिंता तन की चोट कौन देखेगा किसे दिखाऊ जख्म देने बाला भी अपना अच्छा रह जाना है मौन बदन का भूख जिस्म की प्यास हृदये के पीड़ा समझ� read more >>
मैं बचपन हूं मुझे क्यों? सताया जा रहा अभी तो उड़ना सीख रहा था,कि चार दीवारों में डाला जा रहा, आंचल का तो पता नहीं पर बसते की बोझ में द read more >>
तू रुत होती धुप होती रंग थोड़ा रूप होती तू गुल होती गुलशन होती फूल और फूलबड़ी होती दो बून्द महक थोड़ा सा खुशबु होती तो कही गुलदान में ब read more >>
*बुढ़ापे में मस्ती कीजिए* बुढ़ापा आ गया तो आने दीजिए उम्र ढल गई तो ढ़लने दीजिए।। उम्र अब कितनी बची है चिंता न इसकी कीजिए बचपना दिल read more >>
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