आया सावन झूम के, निर्मल हो बरसात।
कोयल गाती गीत है, मधुर मिलन की रात।।
आया सावन झूम के, बादल गरजे घोर।
पवन मस्त है रूप में, नई लगी है भोर� read more >>
उड़ने दो उन्हें खुले आसमान में फिर लौट कर वे ज़माने नहीं आते |जब माँ की ऊँगली पकड़ कर चलते होवे बहाने जीवन में फिर कभी नहीं आते |जब पापा के � read more >>
दिनाका - (05)/12/2022)
(गटबन्धन)
शाईरी सोमवार
| शायार-लेख, मोहम्मद फैजान सिद्धिकी:
पिता रईस अहमद सिद्धिकी.
जब दो दिल- आपास में। मिलते हैं।
तो � read more >>