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अपनों की पहचान

MD SHAYEED ALAM 19 Nov 2025 शायरी समाजिक शायरी मोहम्मद सईद आलम 6927 0 Hindi :: हिंदी

मुसीबत में ही होती है अपनों की पहचान, 
कि खुशियों में तो आ जाते हैं बिन बुलाए मेहमान।।

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