Raj Ashok 27 May 2024 शायरी समाजिक बिसात 36494 0 Hindi :: हिंदी
हाथ की लकीरों में खज़ाने होते । तों मुकद्दर की क्या बिसात थी ।। हर कोई शहंशाह होता !! दुनियां में मेहनत पे ....... यकीन करने वालों की क्या औकात थी ।
Login to post a comment!
Jai jai ho...