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चलती हैं आंधियां तो आशियाने उजड़ जाते हैं-चमन के खिलखिलाते हुए फूल उखड़ जाते हैं

SHAHWAJ KHAN 16 Jul 2023 शायरी समाजिक आंधिया, आशियाने, सियाशत, समाज, शायरी, राजनीतिक, 68908 1 5 Hindi :: हिंदी

चलती हैं आंधियां तो आशियाने उजड़ जाते हैं
चमन के खिलखिलाते हुए फूल उखड़ जाते हैं ।
अब तो सियासत भी आंधियों से कम नहीं लगती
आ जाए मुआशरे में तो हालात बिगड़ जाते हैं  ।

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SHAHWAJ KHAN
SHAHWAJ KHAN मौजू सियासत का

2 years ago

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