Karuna bharti 25 Jun 2025 शायरी दुःखद Karuna . Com 13972 0 Hindi :: हिंदी
एक सिक्के उछालकर,खुदकी तकदीर देख रहा था उनके जज्बातो मे अपने लिए,प्यार ढूढ़ रहा था वहम था की इश्क,बेपनाह है दोनों मे जबकि मे अकेले ही इस कश्ती को,डूबने से बचा रहा था
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