मोती लाल साहु 07 Jun 2023 शायरी समाजिक सोचा था- कुछ ग़म बांट लूं- रिश्तों में, क़रीब गया- वह तो दुखों के पहाड़ तले थे- मैं चोटी में था। 32791 0 Hindi :: हिंदी
गुज़र रहे थे- वक्त काल बनकर,, सोचा था- कुछ ग़म बांट लूं रिश्तों में,, क़रीब गया- वह तो दुखों के, पहाड़ तले थे-मैं चोटी में था....!!!! -मोती