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जब इंसान में अपनी कामयाबी पर ग़ुरूर आ जाता है

मोती लाल साहु 27 May 2023 शायरी समाजिक जब इंसान में अपनी कामयाबी- पर ग़ुरूर आ जाता है, उसे रिश्तो की अहमियत- नज़र नहीं आती- शिष्टाचार- व्यवहार से- अभिमानी का क्या नाता और वह समय प्रारब्ध- अकेला रह जाता है। 50811 0 Hindi :: हिंदी

जब इंसान में-
अपनी कामयाबी, 
पर ग़ुरुर आ जाता है....

उसे रिश्तों की-
अहमियत नज़र नहीं आती,,

शिष्टाचार,व्यवहार से-
अभिमानी का क्या नाता,,
 
और वह समय-
प्रारब्ध अकेला रह जाता है....!!!!
-मोती

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