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कमी

MD SHAYEED ALAM 27 May 2026 शायरी समाजिक शायरी मोहम्मद सईद आलम 11298 1 5 Hindi :: हिंदी

आज छुट्टी में जब गांव जाता हूं, 
बस एक कमी ही मैं पाता हूं। 
गांव वही है घर वही है। 
सारे रिश्तेदार वही हैं। 
पर दरवाजे पर मेरी राह तकते,
 अब बस मेरी मां नहीं है।।

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Sonu nayak Nayak
Sonu nayak Nayak Nice

1 month ago

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