Jyoti Aggarwal 18 May 2026 शायरी दुःखद शायरी 3844 0 Hindi :: हिंदी
कौन सी कश्ती में सवार हूं मैं जाने जिंदगी कहां ले जा रही है दिन प्रतिदिन घटते जा रहे हैं हम उनके प्यार में इंतजार करते जा रहे हैं पता नहीं किस दिन उन्हें एहसास होगा कि हम उन्हें दिल और जान से चाहते हैं मगर वह बेखबर है हमारे बेइंतहा प्यार से अब हमने भी प्यार करने और पाने की जिद ही छोड़ दी है आ जाएगा रहना धीरे-धीरे उनके बिना पता लग गया सभी खुदगर्ज है यहां मन तो करता है कि अपनी हस्ती ही मिटा दूं मगर मुड़कर मासूम बच्चों का चेहरा रोक लेता है अब छोड़ दिया हमने जिंदगी से शिकायत करना सोच के जी लेंगे छूट गया कश्ती को किनारा मिलना
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