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महफिल का मजंर में समझ नहीं पाता

Asim Qureshi 10 Jun 2024 शायरी दुःखद Tears 37548 0 Hindi :: हिंदी

महफिल का मजंर में समझ नहीं पाता,
लोग मुझे बुरा कहते है,
लेकिन फिर भी मेरी ही बाते करते है, 
यह कैसी अजीब बात है,
लोग मेरी बुराई सरे आम करते है,
लेकिन फिर भी लबो पे मेरा ही नाम रखते है।

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