मोती लाल साहु 17 Jun 2023 शायरी समाजिक हर दिन- एक ज़ोरदार ज़ख़्म- रोज़ उधेड़ कर- हरा हो जाना- मौत को कोई इतला तो करो- मैं इश्क़ की भूखी बैठी हूं। 27674 0 Hindi :: हिंदी
"हर दिन- एक ज़ोरदार ज़ख़्म,, "रोज़- उधेड़ कर हरा हो जाना,, "मैं इश्क- की भूखी बैठी हूं,, "मौत को- कोई इतला तो करो....!!!! -मोती