SHAHWAJ KHAN 26 Apr 2023 शायरी प्यार-महोब्बत मोहब्बत, लव, प्रेम, हुस्न, जमाल शायरी 51607 0 Hindi :: हिंदी
न हुस्न देखता हूँ न जमाल देखता हूँ |
तुम्हारी नर्गिशी आँखों में कमाल देखता हूँ|
झुकी हुई नज़रों को उठाना फिर उठाकर झुकाना
मानों जैसे कोई ख्याल देखता हूँ |
और होता है तकाबुल जब भी उससे महफिल में
उसकी खामोश नजरों में कई सवाल देखता हूँ |
और जमाना जब भी कह देता है मुझको आशिक
तो अक्सर उसके चेहरे पर मासूमियत का जलाल देखता हूँ |
.......शहवाज खान......