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पिता की याद

MUKESH KUMAR DHODHAWAT 02 Aug 2025 शायरी दुःखद #हुए हम चकनाचूर पर कांच नहीं हैं 19935 0 Hindi :: हिंदी

हुए हम चकनाचूर पर कांच नहीं हैं 
 और बता सकते है कि 
अब पहले जैसी छांव नहीं हैं 
वो दौर था एक जब हमारे आने की खबर से पिता ने अपनी नींद त्यागी और कहा 
अब ज्यादा रात नहीं हैं 
मन अब इस जिस्म से खिलवाड़ करना कब छोड़ेगा कि
 वो छत अब हमारे पास नहीं हैं

मुकेश कुमार धोधावत 
7726075950

कृपया इस को दिल की गहराई से पढ़ें

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