Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

रूहानियत

शरद भूषण मोंगरा 24 Apr 2026 शायरी धार्मिक रूहानियत, भीतर गहरे में, परमात्मा, ईश्वर, 5844 0 Hindi :: हिंदी

"रूहानियत के लिए",

वो नूर (ईश्वर) मेरे भीतर है, मैं (अहं) मानती नहीं है
रूह रोज़ अपने रब के सजदे से चूकती है।

इश्क खुदा की जात है इश्क कि डोर कमाल ।
जिसने जाना है इशक को हो गया मालामाल।।

उसकी दुनिया में बुद्धू बन के चल
 शायद तेरे पाप कम हो जाएं।

अल्लाह अल्लाह सब करें अल्लाह का घर दूर।
अल्लाह बैठा आपमे सब जग मद में चूर।।

वो मेरा बाप है भरकर निवाला  देता है
कि मैं बेशर्म हूं ताउम्र पड़ा सोता हूं।

माया का संसार है, कर्म रहे हैं हार।
लालच में है खो गया, अब अपनों का प्यार।।

है मुझे काम क्या तेरे सिवा जमाने में 
तू ही बसता है मेरे रात दिन वीराने में।

दुनिया की चिराग बत्ती जलाता रहा ताउम्र
मैं झूठ में खुदा को बताता रहा ताउम्र
रब जोत जल रही है इस जिस्म के मंदिर में
मैं बाहर के  शंख घंटे बजाता रहा ताउम्र।


शरद भूषण मोंगरा
कवि शायर गीतकार लेखक।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

मेरे नजर के सामने तुम्हारे जैसे बहुत है यहीं एक तू ही हो , मोहब्बत करने के लिए यह जरूरी तो नहीं read more >>
मीठी-मीठी यादों को दिल मैं बसा लेना जब आऐ हमारी याद रोना मत हँस कर हमें अपने सपनों मैं बुला लेना read more >>
दोस्ती करो तो धोखा मत देना दोस्तों को आंसुओ का तोहफ़ा मत देना दिल से रोए कोई तुम्हे याद करके ऐसा किसी को मौका मत देना।। दोस्ती तो सिर� read more >>
Join Us: