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सफ़र हद से अनहद तक....

मोती लाल साहु 19 Jun 2023 शायरी समाजिक #जीवन का मार्ग, असहनीय दुखों और कष्टों का ठोकरों से भरा जंजर लगता है #यह तो अच्छा है मैं देख पा रहा हूं , संभल-चेतकर चलना है मेरे शेष बचे हुए कर्मों का हिसाब होना है #हद से अनहद तक का सफ़र जो है। 26676 0 Hindi :: हिंदी

जीवन का-
मार्ग असहनीय दुखों,
और कष्टों का ठोकरों 
से भरा जंजर लगता है

यह तो अच्छा है-
मैं देख पा रहा हूं,
संभल-चेतकर चलना है 

मेरे शेष बचे हुए-
कर्मों का हिसाब होना है

हद से-
अनहद तक का सफ़र जो है...!!!
-मोती

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