Raj Ashok 28 Apr 2023 शायरी समाजिक शौकबंद 45129 0 Hindi :: हिंदी
मै हिसाब नहीं रखना ।
कभी अपनी, वादिल मस्ती यों का
हर लम्हा तो मुझे जीना है ।
यहाँ शौकबदं गूमानी मे ,
फिक्र मुझे क्यों ? फिक्र तो वो करे
जिन्हें अपने कल का कुछ पता हो