Saurabh Sonkar 30 Oct 2023 शायरी प्यार-महोब्बत दर्द - ए- दिल बयाँ कुछ इशारा कर रहा है इशारों ही इशारों में दर्दें बयाँ दिल कर रहा है सांस ले लम्बी ज़रा तू आस ले लम्बी रौनके महफिल जमेगी फिर उठ सम्हल समय वक्त ये इशारा कर रहा है कर फ़िक्र न अब तू जमाने की लोग उलझे हुए हैं अपनी ही बनाई गुथ्थियों में ये इश्क़ के आँसू बडे गमगीन होते हैं ये प्यार के किस्से बडे नमकीन होते हैं ये इश्क़ के जुर्म ही बडे संगीन होते हैं हे ! मुज़रिम इश्क़ के तू रख भरोसा वक्त पर खिल उठेगा तेरा बदन फिर से तेरे इश्क़ सी गहराइयाँ भी थाह न होगी समुन्द्र की जिसकी बुलन्दियों की ऊँचाईयाँ भी होंगी गिर सी थमजा, ठहर जा गुज़र जाने दे वक्त को लौटेंगी खुशियाँ फिर से बहेंगी धारा जैसे समीर सी चहक उठेगी ज़िन्दगी रौनके महफिल जमेगी फिर से - सौरभ सोनकर 29334 0 Hindi :: हिंदी
दर्द - ए- दिल बयाँ कुछ इशारा कर रहा है
इशारों ही इशारों में दर्दें बयाँ दिल कर रहा है
सांस ले लम्बी ज़रा तू आस ले लम्बी
रौनके महफिल जमेगी फिर
उठ सम्हल समय वक्त ये इशारा कर रहा है
कर फ़िक्र न अब तू जमाने की
लोग उलझे हुए हैं
अपनी ही बनाई गुथ्थियों में
ये इश्क़ के आँसू बडे गमगीन होते हैं
ये प्यार के किस्से बडे नमकीन होते हैं
ये इश्क़ के जुर्म ही बडे संगीन होते हैं
हे ! मुज़रिम इश्क़ के तू रख भरोसा वक्त पर
खिल उठेगा तेरा बदन फिर से
तेरे इश्क़ सी गहराइयाँ भी थाह न होगी समुन्द्र की
जिसकी बुलन्दियों की ऊँचाईयाँ भी होंगी गिर सी
थमजा, ठहर जा गुज़र जाने दे वक्त को
लौटेंगी खुशियाँ फिर से
बहेंगी धारा जैसे समीर सी
चहक उठेगी ज़िन्दगी
रौनके महफिल जमेगी फिर से
- सौरभ सोनकर