MD SHAYEED ALAM 04 Jan 2026 शायरी समाजिक शायरी उम्मीद की कश्ती 12579 0 Hindi :: हिंदी
उम्मीद की कश्ती में सवार, दुनिया के समंदर में निकला हूं मैं। हर तरफ लगा है मेला, फिर भी तन्हा अकेला हूं मैं। परवाह नहीं मुझे, मंजिल मिलेगी या नहीं? पर लडूंगा आखरी सांस तक , उम्मीद का दामन नहीं छोडूंगा मैं।।