Swami Ganganiya 28 Sep 2026 शायरी अन्य Shyri 5688 0 Hindi :: हिंदी
दूसरों से की गयी वफादारी भी कभी – कभी बेईमानी नजर आती है। बेवजहा की गयी ईमानदारी भी कभी -कभी बेईमानी नजर आती है। जो लोग आज भी, अपने लिए वफादार दिखते है वक़्त बदला नहीं के उनके हाथों मे कटार दिखते है। हे खरीदारी किस के किरदार की बिकता यहाँ हर कोई दिखता है। बेच रहा था जो, खुद के किरदार को हर मोल -भाव मे यहाँ,अपना ही किरदार दिखता है। खरीदा ना जा सका, जो किसी भी दाम मे आज, चन्द रिश्तों मे, बिखरा दिखता है। बेच रहा था यहाँ, हर कोई खुद को यहाँ हर कोई खरीदार दिखता है। खरीदनें की हैसियत नहीं थी जिसकी ऊंचे दाम, बोल रहा था सबको। भाग्य का लेखा बोलकर तौल रहा था सबको। किस्मत मे जिसकी जितना उतना ही मिलेगा ये बोल रहा था सबको। कुछ रूपया रखकर मुट्ठी मे खाली खोल रहा था उसको। आश्चर्यचकित थे यह सब देखकर बिना कीमत के ही तौल रहा था सबको। पर जो भी था सत्य बोल रहा था सबको। 🙏🌼swami ganganiya 🥀🍁