Arjun yadav dikoli 02 Nov 2025 शायरी दुःखद ग़ज़ल/शायरी/कहानी/पत्रलेखन/गीत/कड़वा सच 8252 0 Hindi :: हिंदी
💔 "कड़वा सच –
कभी सोचा था रिश्ते सच्चे होंगे,
पर अब तो मतलब ही अपने अच्छे होंगे।
वक़्त ने सिखाया ये कड़वा सबक,
लोग पास भी हों तो पराये लगते होंगे।
मुस्कान के पीछे हज़ार नकाब हैं यहाँ,
हर चेहरा एक नया जवाब है यहाँ।
जिसे अपना समझा, वही सबसे पराया निकला,
दिल ने जिस पर भरोसा किया, वही सज़ा निकला।
अर्जुन ने भी सीखा अब हालात पढ़ना,
लोगों की बात नहीं, उनकी औक़ात पढ़ना।
अब मोहब्बत नहीं, सुकून चाहिए,
झूठे वादे नहीं, बस सच्चा जूनून चाहिए।
कड़वा है ये सच, मगर सच ही सही,
वफ़ा अब सिर्फ़ लफ़्ज़ों में रही।
ज़िंदगी ने तोड़ कर जो सिखाया है,
वो किसी किताब ने नहीं बताया है।
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